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देवभूमि हिमाचल के 12 जिलों में स्थित प्रमुख मंदिर एवं उनसे जुड़ी महत्त्वपूर्ण जानकारी!

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यह मंदिर शिवालिक पहाड़ियों पे स्थित है। यह हमीरपुर के दियोटसिद्ध में स्थित है। 2. मुरली मनोहर मंदिर  यह मंदिर भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण राजा संसारचंद ने 1790 में कराया था। 3.गौरी शंकर मंदिर  यह मंदिर हमिरपुर के सुजानपुर टिहरा में स्थित है। इस मंदिर का निर्माण राजा संसारचंद ने 1793 ई. में करवाया था। बिलासपुर बिलासपुर जिला प्राचीन समय में कहलूर के नाम से जाना जाता था। इस जिले के महत्वपूर्ण मंदिर है: 1. श्री नैना देवी मंदिर  यह एक बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर है। न सिर्फ हिमाचल बल्कि पूरे भारत वर्ष में इसकी मान्यता है। यह इक्यावन(51) शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि यहां सती के नैन गिरे थे। इस मसन्दिर का निर्माण वीरचंद ने करवाया था। 2. गोपाल जी मंदिर  यह मंदिर भी भगवान मदन गोपाल को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण राजा आनंद चंद ने 1938 ई. में करवाया था। 3. देवभाटी मंदिर  देवभाटी मंदिर ब्रह्मपुखर का निर्माण राजा दीपचंद ने करवाया था। ऊना ऊना जिले के लोग बड़े धार्मिक विचारों के है। यहां के विभिन्न मंदिर इस प्रकार है: 1. चिंतपूर्णी मंदिर यह मंदिर भी हिमाचल में ही नही अपितु भारत वर्ष में प्रसिद्ध है। यह भी एक महत्वपूर्ण शक्तिपीठ है ऐसी मान्यता है कि यहाँ माता का मस्तक गिरा था। इसलिए माता को छिन्नमस्ता भी कहते हैं। कुछ मान्यताएं कहती हैं कि यहां देवी के चरण गिरे थे। 2.भ्रमोति यह मंदिर भगवान ब्रह्मा को समर्पित है। आप मे से बहुत कम इसके बारे में जानते होंगे क्योंकि ब्रह्मा जी के पूरे संसार मे केवल दो ही मंदिर है एक पुष्कर राजस्थान व दूसरा यहां ऊना में, परन्तु ये पुष्कर जितना प्रसिद्ध नहीं है। 3.गरीब नाथ यह मंदिर बहुत ही सुंदर जगह पर है। यह मंदिर सतलुज नदी के भीतर बना हुआ है तथा मंदिर में जाने के लिए नाव पे जाना पड़ता है। यहां पर शिवजी की भी एक बहुत ही सुंदर प्रतिमा है। सोलन सोलन में बहुत मंदिर है आपको यह जानकर खुशी होगी कि सोलन शहर का नाम वहां की देवी शूलिनी के नाम पर ही पड़ा है। यहां के प्रमुख मंदिर है: 1. शूलिनी देवी  यह मंदिर सोलन में ही स्थित है। हर वर्ष यहां पर शूलिनी माता का मेला लगता है। यह मेला एक सप्ताह तक चलता है। 2.जटोली मंदिर  यह मंदिर ओचघाट के समीप है। यह एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है। इसका नाम शिव की लम्बी लम्बी जटाओं से पड़ा है। 3. काली का टिब्बा  यह सोलन के चैल में स्थित काली देवी का मंदिर है। यहाँ से आप चुरचांदनी और शिवालिक पहाड़ियों का मनोरम दृश्य देख सकते है। सिरमौर सिरमौर में हिमाचल के काफी पवित्र स्थान है यहाँ भगवान परशुराम की माता रेणुका जी का मंदिर है व ऐसी मान्यता है कि वे यहां झील के रूप मे हैं।अन्य मुख्य मंदिर इस प्रकार है: 1. शिर्गुल मंदिर यह मंदिर चूड़धार पहाड़ी पर स्थित है।यह मंदिर भगवान शिर्गुल को समर्पित है। यह बहुत ही ऊंचाई पर स्थित है लगभग 3647 मी. ,यहां भगवान शिव की प्रतिमा है। 2. गायत्री मंदिर गायत्री माता को वेदों की माता भी कहा जाता है। यह मंदिर रेणुका में स्थित है। इस का निर्माण महात्मा पराया नंद ब्रह्मचारी ने करवाया था। 3. बाला सुंदरी मंदिर यह मंदिर सिरमौर के त्रिलोकपुर में स्थित है। इस मंदिर का निर्माण दीप प्रकाश ने 1573 ई. में करवाया था यरह माता बाल सुंदरी को समर्पित है। मंडी मंडी को हिमाचल की छोटी काशी भी कहते है। यहाँ पर इक्यासी(81) मंदिर है जबकि वाराणसी में अस्सी(80) मंदिर है। जिले के मुख्य मंदिर इस प्रकार है: 1. भूतनाथ मंदिर राजा अजबर सेन ने इस मंदिर का निर्माण 1526 ई. में करवाया था।यह मंदिर मंडी में स्थित है। 2 श्यामाकाली मंदिर यह मन्दिर मंडी में स्थित है तथा इसका निर्माण राजा श्यामसेन ने करवाया था। 3 पराशर मंदिर यह मंदिर बाणसेन ने बनवाया था। यह मंडी की प्रसिद्ध झील पराशर के किनारे स्थित है। शिमला हिमाचल की राजधानी शिमला तो आप सब से परिचित ही है। आप सब को यह जान कर हैरानी होगी कि शिमला का नाम भी किसी देवी के नाम पर पड़ा है। जी हाँ शिमला का नाम श्यामला देवी से पड़ा है। श्यामला देवी भगवती काली का दूसरा नाम है। यहाँ के प्रमुख मंदिर है: 1. जाखू मंदिर ऐसी मान्यता है कि जब श्री हनुमान जी लक्ष्मण के लिए संजीवनी बूटी लेने गए थे तो उन्होंने यहां पर विश्राम किया था।यह मंदिर शिमला के जाखू में स्थित है। यह भगवान हनुमान जी को समर्पित है।यहाँ हनुमान जी की 108 फुट ऊंची मूर्ति बनाई गई है। 2. सूर्य मंदिर यह मंदिर भगवान सूर्य को समर्पित है। कोणार्क के बाद ये दूसरा सूर्य मंदिर है भारत में। यह शिमला के ‘नीरथ ‘ में स्थित है। 3 कालीबाड़ी मंदिर यह मंदिर शिमला में स्थित है। यह मंदिर काली माता को समर्पित है।इन्हें ही श्यामला देवी भी कहा जाता है। इन्ही के नाम पर शिमला शहर का नामकरण हुया है। कुल्लू कुल्लू में बहुत देवी देवताओं ने वास किया था। कुल्लू राजवंश की कुल देवी माता हिडिम्बा को माना जाता है। निरमण्ड को कुल्लू की छोटी काशी कहते हैं।यहाँ के मुख्य मंदिर इस प्रकार है: 1. हिडिम्बा देवी हिडिम्बा देवी का मंदिर मानाली में स्थित है जिसे कुल्लू के राजा बहादुर सिंह ने 1553 ई. में बनवाया था। हिडिम्बा देवी भीम की पत्नी थी। यह मंदिर पैगोडा शैली का बना हुआ है। इस मंदिर में हर वर्ष मई के महीने में डूंगरी मेला लगता है। 2. बिजली महादेव मंदिर यह मंदिर कुल्लू से 14 किलोमीटर दूर ब्यास नदी के किनारे स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है यहां शिवलिंग पर बिजली गिरती है। 3. जामलु मंदिर यह मंदिर विश्व प्रसिद्ध मलाणा गांव में स्थित है। मलाणा गांव में पूरे विश्व का सबसे पुराना लोकतंत्र आज भी मन जाता है। यह मंदिर जमदग्नि ऋषि को समर्पित है। कांगड़ा कांगड़ा जिला भी पूरे भारतवर्ष में प्रसिद्ध है यहाँ का ब्रृजेश्वरी मन्दिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु आते है व उनकी कई मनोकामनाएं पूर्ण होती है।यहाँ के मुख्य मंदिर इस प्रकार है: 1. बृजेश्वरी मंदिर यह मंदिर 51 शक्ति पीठो में से एक है। यहां माता सती का धड़ गिरा था। यह मंदिर कांगड़ा बस स्टॉप से 3 कम की दूरी पर स्थित है। 2. मसरूर मंदिर इस मंदिर को रॉक कट मंदिर भी कहते है। यह पांडवो द्वारा निर्मित बहुत ही प्राचीन मंदिर है। यह भगवान शिव को समर्पित है। इसे हिमाचल का अजंता भी कहते है।यह मंदिर कांगड़ा के नगरोटा सूरियां में स्थित है। 3. ज्वालामुखी मंदिर यह भी 51 शक्तिपीठों में से एक एक है।यहाँ माता सत्ती की जीभ गिरी थी। अकबर ने यहाँ सोने का छतर चढ़ाया था जो माता ने स्वीकार नहीं किया व वह किसी अन्य धातु में परिवर्तित हो गया। महाराजा रणजीत सिंह ने यहाँ 1813 ई . में स्वर्ण जल का गुम्बद बनवाया था। यह कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी में स्थित है। किन्नौर यहाँ हिमाचल के अति प्राचीन मंदिर मिलते है।ऐसा मानना है कि पांडव अपने अज्ञात वास के दौरान यहाँ रहे थे।यहाँ के मंदिरों में मुख्यता लकडी व पत्थरो पे शिल्प के नमूने मिलते है।यहाँ के मुख्य ममंदिर इस प्रकार है: 1.चंडिका मंदिर यह मंदिर किन्नौर के कोठी में स्थित है तथा यह माता चंडिका को समर्पित है। चंडिका बाणासुर की पुत्री थी। चंडिका माता को दुर्गा माता का स्वरूप माना जाता है। 2. माठि देवी मंदिर यह मंदिर छितकुल जो भारत का आखिरी गांव है वहाँ स्थित है। छितकुल गांव के लोग माठि देवी को बहुत मानते है। 3. मोरंग मंदिर किन्नौर यह पांडवो द्वारा निर्मित बहुत ही सुंदर मन्दिर है। यह पहाड़ की चोटी पर स्थित है तथा प्राचीन समय में पांडवो ने इस के निर्माण करवाया था। किन्नौर के लोग आज भी इस मंदिर को बड़ा मानते है। चम्बा चम्बा जिला को शिव भूमि भी कहा जाता है।यहाँ शिव जी का निवास स्थान मणिमहेश भी है।हर वर्ष लोग मणिमहेश की यात्रा में बड़ चड कर भाग लेते है।यह यात्रा मुख्यता जुलाई -अगस्त मास में होती है।यहां के अन्य मुख्य मंदिर है: 1. लक्ष्मी देवी मंदिर इस मंदिर का निर्माण साहिल वर्मन द्वारा कराया गया था।यह चम्बा में स्थित है।यह मुख्यता छह मंदिरो का समूह है। 2 . सुई माता मंदिर यह मंदिर माता नैना देवी जो साहिल वर्मन की पत्नी थी उनको समर्पित है।माता नैना देवी ने चम्बा में पानी लाने के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया था।यहाँ हर वर्ष उनकी याद में सुई मेला लगता है। 3. मणिमहेश मंदिर इस मन्दिर का निर्माण मेरु वर्मन ने करवाया था।चम्बा के भरमौर में चौरासी मंदिरो का समूह भी है।मणिमहेश यात्रा के समय इन मंदिरो के दर्शन जरूर करते है श्रद्धालु। लाहौल स्पीति लाहौल स्पीति हिमाचल का सबसे दुर्गम व सबसे बड़ा जिला है। यहाँ के लोग मुख्यता हिन्दू व बौद्ध धर्म को मानते है।यहाँ के प्रसिद्ध मंदिर इस प्रकार है: 1. मृकुला देवी यह मंदिर लाहौल के उदयपुर में स्थित है।इस मंदिर का निर्माण अजय वर्मन द्वारा करवाया गया था।यह मुख्यता लकड़ी से बना हुआ मंदिर है। 2. त्रिलोकीनाथ मंदिर यह मंदिर लाहौल स्पीति के उदयपुर में स्थित है। यहाँ पर अविलोकतेश्वर की मूर्ति है। यह मंदिर हिंदुयों और बोध दोनों सम्प्रदायों के लिए पूजनीय है। 3. गुरु घंटाल गोम्पा Gandhola Monastery लाहौल के तुपचलिंग गांव में स्थित है। यहाँ अविलोकतेश्वर की 8 वीं शताब्दी की मूर्ति है जिसका निर्माण पद्मसंभव नर करवाया था। यहाँ हर वर्ष जून माह में घंटाल उत्सव मनाया जाता है

हिमाचल  — को प्राचीन काल से ही देवभूमि के नाम से संबोधित किया गया है। यदि हम कहें कि हिमाचल देवी-देवताओं का निवास स्थान है तो बिल्कुल भी गलत नही होगा। हमारे कई धर्मग्रन्थों में भी हिमाचल वाले क्षेत्र का वर्णन मिलता है। महाभारत, पद्मपुराण और कनिंघम जैसे धर्मग्रन्थों में

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तो क्या धरती का विकल्प मिल गया है? इस ग्रह पर है मानव जीवन की सम्भावना

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‘मानव सभ्यता का जन्म पृथ्वी पर हुआ है पर उसका अंत धरती पर होने के लिए नहीं बना है.’ पृथ्वी से 16 प्रकाश वर्ष दूर इस ग्रह पर हो सकती है जीवन की संभावना क्रिस्टोफ़र नोलन को यूं ही एक Visionary निर्देशक नहीं कहा जाता. 2014 में आई Interstellar के

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हिमाचल में यहां है पांडवों द्वारा निर्मित बेजोड़ कला का नमूना रॉक कट मसरूर मंदिर!

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हिमाचल प्रदेश की धरती दार्शनिक स्थलों व देवस्थलों के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है।  ऐसा ही एक धार्मिक स्थल  नगरोटा सूरियां से तकरीबन 11 किलोमीटर की दूरी पर मसरूर पंचायत में स्थित है जोकि रॉक कट टेंपल के नाम से प्रसिद्ध है। इस मंदिर को पांडवों द्वारा अपने अज्ञातवास के दौरान

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तिरंगे को कहीं भी, कभी भी नहीं फहराया जा सकता, जानिये इससे जुड़े नियम

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15 अगस्त के दिन सारे देश ने आज़ादी की 70वीं सालगिरह को अपनी-अपनी तरह से मनाया. एक ओर जहां लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को अपनी उपलब्धि गिनवा रहे थे. वहीं दूसरी ओर बॉलीवुड भी आज़ादी की खुशियों को अपने ही अंदाज़ में बांट रहा था.   15

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आइये पढ़ें पुराणों में छिपी इस कथा में शनिदेव की दृष्टि नीचे रहने का रहस्य

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शनिदेव – कैसे हुआ जन्म और कैसे टेढ़ी हुई नजर अक्सर शनि का नाम सुनते ही शामत नजर आने लगती है, सहमने लग जाते हैं, शनि के प्रकोप का खौफ खा जाते हैं। कुल मिलाकर शनि को क्रूर ग्रह माना जाता है लेकिन असल में ऐसा है नहीं। ज्योतिषशास्त्र के

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Patrode, Arbi Leaves, Colocasia leaves Snack Recipe

How to make Arbi Leaves Snack (Pathrode/पत्तरोड़े/पतोड़े) , patode , patodu recipe , himachali food , himachali recipe, himachali cuisine , himachali tadka. , indian cuisine , indian recipes , recipes , patrode himachali recipe , patrode recipe indan

About Arbi Leaves Snack ( Patrode ), a famous and seasonal dish of Himachal Pradesh.   Arbi Leaves Snack or Patrode , a succulent delicacy which is famous all over the world. Arbi Leaves Snack (Patrode) is one dish which makes its accompaniments tastier. With the overflow of flavours, Arbi Leaves

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शेषनाग की हुंकार से आज तक उबलता है यहाँ का पानी, जानिए क्या है मणिकर्ण के इस चमत्कार का रहस्य

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दोस्तो शुरू करने से पहले ही मैं बता दूँ , मणिकर्ण की इस कहानी से हमारा मतलब अन्धविश्वास फैलाना बिलकुल भी नहीं हैं एवं इस कहानी में हमनें अपनी तरफ से कोई भी रहस्य नहीं जोड़े हैं. जो कहानी आप पढ़ने जा रहे वो मणिकर्ण तीर्थ स्थल पर लिखी हुई है। ना तो हम

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पैराग्लाइडिंग के लिए दुनिया की दूसरी बेस्ट जगह हिमाचल में है और लोगों को इसका पता ही नहीं

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उत्तर भारत के लोगों के लिए हिमाचल प्रदेश एक ऐसी जगह है, जहां भीड़-भाड़ भरी दुनिया से निकल कर, वो खुद को जन्नत के करीब पाते हैं. इस जन्नत के बीच भी कुछ ख़ास जगहें ऐसी हैं, जहां लोग बार-बार आना पसन्द करते हैं. अब जैसे Bir Biling को ही

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ये तस्वीरें साबित करती हैं कि HRTC Bus Drivers सच में तूफ़ानी हैं

ये तस्वीरें साबित करती हैं कि HRTC Bus Drivers सच में तूफ़ानी हैं , hrtc dangerous roads , himachal roads , hrtc , pahadi road , hrtc routs , himachali roots

हरी-भरी पहाड़ियां, बहते झरने और चेहरे पर गिरती ओस की बूंदें ये ज़ाहिर करती हैं कि आप हिमाचल प्रदेश की धरती पर हैं. हिमालय की कोख में बसा ये राज्य अपनी वादियों की वजह से लोगों का मन मोह लेता है. लेकिन हिमाचल की मजबूत और दिलकश पहाड़ियों के अलावा

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श्राई कोटि माता मंदिर- यहां पति-पत्नी एक साथ नहीं कर सकते दर्शन, शिव पुत्रों से जुडी है कहानी

Sri Koti Mata Temple Himachal History in Hindi , shree koti , sree koti , श्राई कोटि माता मंदिर- यहां पति-पत्नी एक साथ नहीं कर सकते मां दुर्गा के दर्शन, शिव पुत्रों से जुडी है कहानी

श्राई कोटि माता मंदिर- यहां पति-पत्नी एक साथ नहीं कर सकते मां दुर्गा के दर्शन, शिव पुत्रों से जुडी है कहानी Shrai Koti Mata Temple Himachal History in Hindi : श्राई कोटि माता मंदिर से जुड़ा इतिहास   भारत में अनेकों ऐसे मंदिर है जो अपनी अनोखी परंपराओं के कारण प्रसिद्ध है। हमने अपने

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