अजब गजब : यहां जीतकर लौटने के बाद माता के मंदिर में चढ़ाया जाता है मैडल और ट्रॉफी

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में गांव कडिंगचा. कुल्लू के साथ लगती लगवैली का अत्यंत दुर्गम गांव. करीब 3 सौ की आबादी और उसमें 60-70 युवा हैं. आम युवाओं की तरह यहां के युवा भी खेलों में हिस्सा लेने के लिए टीम बनाकर आसपास के गांवों में जाते हैं. लेकिन इनकी टीम की एक बात है, जो दूसरे खिलाड़ियों और टीमों से इन्हें अलग बनाती है.

क्योंकि किसी भी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने और जीतकर लौटते के बाद और पहले ये गांव के पास बने फुंगणी माता के मंदिर में पूजा करते है और जीत की कामना करते हैं. ये तो आम बात है लेकिन जब ये जीत कर लौटते हैं तो अपना मेडल, ट्रॉफी, शिल्ड और स्मृति चिन्ह मंदिर में चढ़ा देते हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि इसके पीछे देव आस्था है. माता के मंदिर को सबसे ऊंचा स्थान माना जाता है. इसलिए वे ट्रॉफी और मेडल को मंदिर में लटकाते हैं।

मंदिर में सजता है सम्मान

तमगा, स्मृति चिन्ह मंदिर में टांग दिया जाता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परंपरा काफी पुरानी है हालांकि, पहले इतने खेल मुकाबले नहीं होते थे. लेकिन अब हालात अलग हैं. गांव का युवाओं की टीम ने सबसे पहले माता से आशीर्वाद लेती है

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गांववासियों का दावा है कि कभी भी गांव की टीम किसी टूर्नामेंट में नहीं हारी है. गांव के खिलाड़ियों ने स्थानीय स्तर पर खेलकूद स्पर्धाओं में जीते मेडल माता फुंगणी के मंदिर में चढ़ाए हैं. माता फुंगणी युवक मंडल के प्रधान दुगले राम और बार्ड मेंबर कडिंगचा लुदर सिंह का कहना है कि जहां-जहां भी भी उन्हें खेलने का मौका मिला है, उनकी टीम कभी नहीं हारी.

दुगले राम और लुदर सिंह का कहना है कि वे कबड्डी, बालीबॉल, स्थानीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं. मेलों में होने वाले खेल मुकाबलों में भी गांव के युवा भाग लेते हैं और जीतकर लौटते हैं.

लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र

मंदिर के बाहर लटके तमगे यहां आने वालों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. डुंखरी गाहर पंचायत के प्रधान पूर्ण चंद का कहना है कि हाल ही में ग्रामंग में बालीबॉल और क्रिकेट में गांव की टीम ने जीत हासिल की. मढ़ाल और बाशिंग में प्रतियोगिता में भी वे जीतकर लौटे. उनका कहना है कि माता का आशीर्वाद उनके साथ रहता है.

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हिमाचल के चंबा जिले के एक मन्दिर की सदियों पुरानी प्रथा, लोटे में रखा पानी बताता है मौसम

मौसम विभाग की भविष्यवाणी से इतर गांव में लोग गड़वे (लोटे) में रखे पानी से साल भर के मौसम का पूर्वानुमान लेते हैं। हिमाचल के चंबा जिले के उपमंडल भरमौर के एक मन्दिर में यह प्रथा बहुत पुरानी है, जिसे लोग आज भी पूरी आस्था के साथ मानते हैं।

उपमंडल भरमौर से 33 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ऐतिहासिक कार्तिक स्वामी के मन्दिर में गड़वे में पानी रखने के पांच महीने बाद अगले एक साल के मौसम का पूर्वानुमान जारी होता है। इस परंपरा (मान्यता) का अनुसरण आज भी क्षेत्र के लोग कर रहे…..Continue Reading!

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Posted by: Admin Himachali Roots on

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