Press "Enter" to skip to content

जानिए पांडवों के समय से हिमाचल के पहाड़ों पर बसे मुरारी देवी मंदिर का इतिहास – Himachali Roots

Murari Devi History & Story In Hindi:

माता मुरारी देवी मंदिर एक प्रसिद्ध एवं रमणीक धार्मिक स्थान है जो सुंदर नगर (हिमाचल प्रदेश) के पश्चिम में स्थित पवित्र मुरारी धार (प्राचीन नाम – सिकंदरा री धार) नामक पहाड़ी पर स्थित है। एक दंतकथा के अनुसार इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान किया था।

murari devi himachal , murari mata sundernagar himachal , murari devi history in hindi , murari devi story in hindi , murari devi mata , जानिए पांडवों के समय से हिमाचल के पहाड़ों पर बसे मुरारी देवी मंदिर का इतिहास

प्राचीन काल में पृथ्वी पर मूर नामक एक पराक्रमी दैत्य हुआ। उस दैत्य ने देवताओं को पराजित करने के उद्देश्य से ब्रह्मा जी की घोर तपस्या की और उनसे वरदान मांगा कि मैं अमर हो जाऊं एवं कोई भी देवता या मानव मुझे ना मार सके। तब ब्रह्मा जी ने कहा कि मैं विधि के विधानों से बन्धा हूं, इसलिये तुम्हें अमर होने का वरदान नहीं दे सकता, परन्तु मैं तुम्हें वरदान देता हूं कि तुम्हारा वध किसी भी देवता, मानव या जानवर के द्वारा नहीं होगा बल्कि एक कन्या के हाथों से होगा।

 

make your website , Make your own website at cheapest rates. make your own website at 1200 indian rupees. create your own website , start your own website, create your own website for free

घमण्डी मूर दैत्य ने सोचा कि मैं तो इतना शक्तिशाली हूं, एक साधारण एवं अबला कन्या मेरा वध कहां कर पायेगी? मैं तो अमर ही हो गया हूं। ये सोचकर उस दैत्य ने पृथ्वी लोक पर अत्याचार करने शुरू कर दिये। उसने स्वर्ग पर आक्रमण करके देवताओं को वहाँ से निष्कासित कर दिया और स्वयं स्वर्ग का राजा बन बैठा। समस्त सृष्टि उसके अत्याचारों से त्राहि-त्राहि कर उठी। वो असुर बहुत उपद्रव मचाता था जिस से प्राणियों को बहुत कष्ट सहना पड़ता था।

 

भगवान विष्णु और मूर दैत्य का आपस में हुआ था युद्ध

सभी देवता भगवान विष्णु के पास गए, तो भगवान ने कहा चिंता मत करो, मैं अवश्य आपके कष्टों का निवारण करूँगा । भगवान विष्णु और मूर दैत्य का आपस में युद्ध आरम्भ हो गया जो दीर्घकाल तक चलता रहा। युद्ध को समाप्त न होता देख कर भगवान नारायण को स्मरण हुआ की मूर का वध केवल कन्या के हाथों ही हो सकता है, ऐसा विचार करके वो हिमालय में स्थित सिकन्दरा धार (सिकन्दरा री धार) नामक पहाड़ी पर एक गुफा में जाकर लेट गए।

 

मूर उनको ढूंढता हुआ वहां पहुंचा तो उस ने देखा की भगवान निद्रा में हैं और हथियार से भगवान पे वार करूं, ऐसा सोचा तो भगवान के शरीर से 5 ज्ञानेद्रियों, 5 कर्मेंद्रियों, 5 शरीर कोषों और मन ऐसी 16 इन्द्रियों से एक कन्या उत्पन्न हुयी। उस कन्या ने मूर को युद्ध के लिए ललकारा। तब कन्या और मूर दैत्य का घोर युद्ध हुआ। उस देवी ने अपने शस्त्रों के प्रहार से मूर दैत्य को मार डाला।

मूर दैत्य का वध करने के कारण भगवान विष्णु ने उस दिव्य कन्या को मुरारी देवी के नाम से संबोधित किया। एक अन्य मत के अनुसार भगवान विष्णु जिन्हें मुरारी भी कहा जाता है, उनसे उत्पन्न होने के कारण ये देवी माता मुरारी के नाम से प्रसिद्ध हुईं एवं उसी पहाड़ी पर दो पिण्डियों के रूप में स्थापित हो गयीं जिनमें से एक पिण्डी को शान्तकन्या और दूसरी को कालरात्री का स्वरूप माना गया है। माँ मुरारी के कारण ये पहाड़ी मुरारी धार के नाम से प्रसिद्ध हुई।

 murari devi himachal , murari mata sundernagar himachal , murari devi history in hindi , murari devi story in hindi , murari devi mata , जानिए पांडवों के समय से हिमाचल के पहाड़ों पर बसे मुरारी देवी मंदिर का इतिहास

पांडवों ने अपना अग्यातवास यहाँ पूरा किया था

द्वापर युग में जब पांडव अपना अज्ञातवास काट रहे थे, तब वो लोग इस स्थान पर आये। देवी ने उन्हें दर्शन देकर कहा कि पहाड़ की चोटी पर जाकर खुदाई करो, वहां पर तुम्हें मेरी दो पिण्डियां मिलेंगी। उस स्थान पर एक मन्दिर बना कर उन पिण्डियों की स्थापना करो। माता के आदेशनुसार पांडवों ने वहां एक भव्य मन्दिर का निर्माण किया। आज भी मन्दिर से थोड़े नीचे जाकर देखें तो वहां पर पांडवों के पदचिन्ह कुछ पत्थरों पर देखे जा सकते हैं।

murari devi himachal , murari mata sundernagar himachal , murari devi history in hindi , murari devi story in hindi , murari devi mata , जानिए पांडवों के समय से हिमाचल के पहाड़ों पर बसे मुरारी देवी मंदिर का इतिहास

दिव्य शक्ति ने अपनी उपस्थिति का प्रभाव इस क्षेत्र के लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से कराकर उद्धार किया है। इसी तरह लोगों की आस्था का कारवां बढ़ता गया और सन् 1992 में इस क्षेत्र के लगभग एक दर्जन गावों के माता मुरारी भक्तों ने एक कमेटी का गठन किया एवं उसके बाद अगाध श्रद्धा रखने वालों के आर्थिक सहयोग एवं कमेटी की निष्ठा, कर्मठता, सेवाभाव, इमानदारी, श्रद्धा व समर्पण के एक-एक पुष्प से यह अभूतपूर्व प्रकल्प जनसम्मुख है।

 

विशाल भव्य मुरारी मन्दिर, सरायं, भंडारा भवन व संपत्ति रूपी धरोहर इस शक्तिपीठ की अब विरासत बन चुकी है। मुरारी मन्दिर परिसर में ही सन् 2005 से अटूट भंडारे का शुभारंभ बाबा कल्याण दास (काला बाबा जी) द्वारा किया गया। मुरारी मन्दिर सरायं में एक हज़ार से अधिक श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था है। माता के सभी भक्त एक बार इस मनोरम एवं शांतिमय शक्तिपीठ में पधार कर माता का आशीर्वाद प्राप्त करें एवं यहां के भव्य वातावरण का आनद लें।

 


make your website , Make your own website at cheapest rates. make your own website at 1200 indian rupees. create your own website , start your own website, create your own website for free


आपको ये लेख कितना पसंद आया या इस से सम्बंधित कोई सुझाव हो तो आप हमें कमैंट्स में बता सकते हैं अन्यथा आप हमें इस पते पर मेल भी कर सकते हैं: admin@www.himachali.in

अगर आप भी लिखने के शौकीन हैं या आपके पास कोई लेख हो शेयर करने के लिए तो आप यहाँ पे क्लिक करके हमें अपना लेख तुरंत भेज सकते हैं:

Submit Your Article





Job Notifications From Stay Updated:

*HP Excise And Taxation Recruitment 2017 Notification For 47 Peon, 7 Chowkidar and 5 Drivers’ Vacancies

*HP Animal Husbandry Recruitment 2017, Driver 11 Posts (Himachal Govt)

*Dr YS Parmar University Recruitment 2017 | YSPU Recruitment | 4 Project Coordinator & SRF Posts | 4 Field Investigator, Skilled   Helper & Field Helper Posts – Stay Updated

*Dharamshala Employment Exchange 700 Vacancies ITI, Fitter, Security Guard

*Chamba District Court Recruitment 2017 | Peon & Chowkidar

*Himachal Pradesh State Cooperative Bank Recruitment 2017 | Clerical Jobs

 

इसे भी पढ़िए:

 

मान्यता है कि यह आठ शिवलिंग महाभारत काल से पांडवों द्वारा स्थापित हैं

भारत के विभिन्न प्रांतों में कई ऐसे शिवलिंग मौजूद हैं जिनकी स्थापना महाभारत काल में हुई थी। इनमें से कई शिवलिंग ऐसे हैं जिनके बारे में मान्यता है कि इनकी स्थापना स्वयं पांडवों ने की थी। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ शिवलिंगों के बारे में.Read More!

 

सदियों से निरंतर बढ़ रहे ये अद्भुत चमत्कारी शिवलिंग

पूरी दुनिया में करोड़ों शिवलिंग मौजूद हैं, सभी की अपनी मान्यता और महत्व है। कुछ शिवलिंग अपने इतिहास के कारण प्रसिद्ध हैं तो कुछ अपने से जुड़े चमत्कारों के कारण। भारत में ऐसे ही 5 शिवलिंग हैं, जो बहुत खास माने जाते हैं। ये 5 शिवलिंग इसलिए खास हैं क्योंकि…..Read More!

 

बिजली महादेव कुल्लू -हर बारह साल में शिवलिंग पर गिरती है बिजली

भारत में भगवन शिव के अनेक अद्भुत मंदिर है उन्हीं में से एक है हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में स्तिथ बिजली महादेव। कुल्लू का पूरा इतिहास बिजली महादेव से जुड़ा हुआ है। कुल्लू शहर में ब्यास और पार्वती नदी के संगम के पास एक ऊंचे पर्वत के ऊपर बिजली महादेव.Read More!

 

श्राई कोटि माता मंदिर- यहां पति-पत्नी एक साथ नहीं कर सकते दर्शन, शिव पुत्रों से जुडी है कहानी

राई कोटि माता मंदिर- यहां पति-पत्नी एक साथ नहीं कर सकते मां दुर्गा के दर्शन, शिव पुत्रों से जुडी है कहानी Shrai Koti Mata Temple Himachal History in Hindi : श्राई कोटि माता मंदिर से जुड़ा इतिहास भारत में अनेकों ऐसे मंदिर है जो अपनी अनोखी परंपराओं के कारण प्रसिद्ध है। हमने.Read More!

 

हिमाचल के ममलेश्वर महादेव मंदिर में है 5 हजार साल पुराना भीम का ढोल और 200 ग्राम का गेंहू का दाना

क्या आपने कभी 200 ग्राम वजन का गेंहूं का दाना देखा है वो भी महाभारत काल का यानी की 5000 साल पुराना? यदि नहीं तो आप इसे स्वयं अपनी आँखों से देख सकते है , इसके लिए आपको जाना पड़ेगा ममलेश्वर महादेव मंदिर जो की हिमाचल.Read More!

 

 

Share Some Love

Comments

comments

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *