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काठगढ़ महादेव, यहां है अदभुत आधा शिव आधा पार्वती रूप शिवलिंग, दो भागों का शिवरात्रि पर हो जाता है ‘मिलन’

kathgarh Mahadev temple kangra himachal pradesh, lord shiva and parvati , lord vishnu , lord brahma , काठगढ़ महादेव : कांगड़ा जिले में है अदभुत शिवलिंग, दो भागों का शिवरात्रि पर हो जाता है मिलन- Himachali Roots ,काठगढ़ महादेव,  अर्धनारीश्वर अदभुत: शिवलिंग धार्मिक दृष्टि से पूरा संसार ही शिव का रूप है। इसलिए शिव के अलग-अलग अद्भुत स्वरूपों के मंदिर और देवालय हर जगह पाए जाते हैं। ऐसा ही एक मंदिर स्थित है – हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित काठगढ़ महादेव । इस मंदिर का शिवलिंग ऐसे स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है, जो संभवत: किसी अन्य शिव मंदिर में नहीं दिखाई देता। काठगढ़ महादेव संसार में एकमात्र शिवलिंग माने जाते हैं, जो आधा शंकर और आधा पार्वती का रूप लिए हुए हैं, यानि एक शिवलिंग में दो भाग हैं। शिव और शक्ति के अर्द्धनारीश्वर स्वरुप श्री संगम के दर्शन से मानव जीवन में आने वाले सभी पारिवारिक और मानसिक दु:खों का अंत हो जाता है।

काठगढ़ महादेव,  अर्धनारीश्वर अदभुत: शिवलिंग   धार्मिक दृष्टि से पूरा संसार ही शिव का रूप है। इसलिए शिव के अलग-अलग अद्भुत स्वरूपों के मंदिर और देवालय हर जगह पाए जाते हैं। ऐसा ही एक मंदिर स्थित है – हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित काठगढ़ महादेव । इस मंदिर

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कामरू नाग :हिमाचल की एक झील जिसमें गड़ा है अरबों का खजाना

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आज हम आपको एक ऐसी झील के बारे में बताने जा रहे है जिसके बारे में कहा जाता है की उसमे अरबों रुपए का खजाना दफन है यह है हिमाचल प्रदेश  के पहाड़ो में स्थित कामरू नाग / कमरुनाग झील। यह झील हरे भरे देवदार के पेड़ो से घिरी हुई है जो मंडी कारासेग मार्ग

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जानिए क्यों पांडवों द्वारा निर्मित शिकारी देवी मंदिर पर आज तक छत नहीं लग पाई?

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शिकारी देवी का यह मंदिर करसोग , जनजेलही घाटी में एक उच्चे शिखर पर 11000 फ़ीट की उचाई में स्थित है. मगर सबसे हैरत वाली बात ये  कि मंदिर पर छत नहीं लग पाई। कहा जाता है कि कई बार मंदिर पर छत लगवाने काम शुरू किया गया। लेकिन हर बार

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वास्तव में यह है पहाड़ों पर बसे श्री नैना देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश से जुड़ा इतिहास और पुराण…

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श्री नैना देवी मंदिर 1177 मीटर की ऊंचाई पर जिला बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश मे स्थित है | कई पौराणिक कहानियां मंदिर की स्थापना के साथ जुडी हुई हैं | एक पौराणिक कथा के अनुसार, देवी सती ने खुदको यज्ञ में जिंदा जला दिया, जिससे भगवान शिव व्यथित हो गए |

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शायद इससे आप वाकिफ न हो, आज हम आपको हिडिंबा देवी के मंदिर के इतिहास से रू-ब-रू कराने जा रहे हैं।

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हिमाचल प्रदेश— के कुल्‍लू में मनाली में स्थित हिडिंबा देवी का मंदिर है। इसका इतिहास पांडवों से जुड़ा हुआ है। शायद इससे आप वाकिफ न हो। आपको इसी मंदिर के इतिहास आज हम रू-ब-रू कराने जा रहे हैं। आप जानते हैं कि जुए में सब कुछ हारने पर धृतराष्ट्र व दुर्योधन

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जानिए क्या है बाबा बालकनाथ जी एवं इनके पूजनीय स्थल दयोटसिद्ध से जुड़ा इतिहास और क्यों है विशेष मान्यता?

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जय श्री बाबा बालकनाथ जी Baba Balaknath बाबा बालकनाथ जी हिन्दू आराध्य हैं, जिनको उत्तर-भारतीय राज्य हिमाचल प्रदेश , पंजाब , दिल्ली में बहुत श्रद्धा से पूजा जाता है, इनके पूजनीय स्थल को “दयोटसिद्ध” के नाम से जाना जाता है, यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के छकमोह गाँव की

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आज हम आपको पहाड़ों पर बसे देवी भीमाकाली मंदिर की परंपरा शक्ति और इतिहास से रू-ब-रू कराने जा रहे हैं।

Bhimakali Temple , भीमाकाली मंदिर के परिसर में भगवान रघुनाथ, नरसिंह और पाताल भैरव (लांकड़ा वीर) के अन्य महत्वपूर्ण मंदिर भी हैं। लांकड़ा वीर को मां भगवती का गण माना जाता है

समुद्र तल से 2165 मीटर की ऊंचाई पर बसे सराहन गांव को प्रकृति ने पर्वतों की तलहटी में अत्यंत सुंदर ढंग से सुसज्जित किया है। सराहन को किन्नौर का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। यहां से 7 किलोमीटर नीचे सभी बाधाओं पर विजय पाकर लांघती और आगे बढ़ती सतलुज

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